सुसाइड नोट लिखने से पहले क्या-क्या लिखा था भय्यूजी महाराज ने…?

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के इंदौर में बसे आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज द्वारा खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर लेने की ख़बर सुर्खियों में है. उनके मिलने-जुलने वालों और उन पर अकीदा रखने वालों में बड़े-बड़े राजनेता भी शामिल रहे हैं. वर्ष 2011 में अण्णा हज़ारे के नेतृत्व में हुए आंदोलन में भय्यूजी महाराज ने UPA सरकार के एक मंत्री के कहने पर मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी. गौरतलब है कि भय्यूजी महाराज ने पिछले साल ही दूसरा विवाह किया था. ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि इस शादी के बाद से पारिवारिक कलह बढ़ गया था. मानसिक तनाव की वजह से भय्यूजी महाराज ने मंगलवार को आत्महत्या कर ली, लेकिन इस दुनिया से हमेशा के लिए चले जाने से पहले वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर लगातार सक्रिय थे. वह अपने अनुयायियों को सलाह देने के साथ-साथ जाने-माने लेखकों-कवियों को भी याद कर रहे थे, और यही नहीं, भय्यूजी महाराज मंगलवार को ही अपने भक्तों को मासिक शिवरात्रि की बधाई देना भी नहीं भूले थे.

भय्यूजी महाराज ने अपनी मृत्यु से कुछ घंटे पहले किए एक ट्वीट में एक प्रेरक सोच अपने फॉलोअरों से बांटते हुए लिखा था, “युवाओं को ऐसे शक्तिशाली नेतृत्व की आवश्यकता है, जो राष्ट्र, समाज और मानवता को एक धारा में बदल सके…”

इसके अलावा भय्यूजी महाराज ने मंगलवार को ही BJP नेता तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज एवं खनन मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को जन्मदिन पर बधाई भी दी, और उनकी दीर्घायु की कामना की.

भय्यूजी महाराज ने इसके बाद देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से नवाज़े गए तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित तेलुगू भाषा के प्रख्यात कवि सिंगीरेड्डी नारायण रेड्डी को उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर नमन किया.

भय्यूजी महाराज के ट्विटर एकाउंट से किए गए अंतिम तीन ट्वीट मासिक शिवरात्रि के बारे में थे, जिनमें उन्होंने सभी भक्तों को इस शिवरात्रि का महत्व समझाते हुए बधाई दी है. उन्होंने लिखा, “आज मासिक शिवरात्रि है… यह प्रत्येक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है… हिन्दू धर्म में इस शिवरात्रि का भी बहुत महत्त्व है… ‘शिवरात्रि’ भगवान शिव और शक्ति के अभिसरण का विशेष पर्व है… धार्मिक मान्यता है कि ‘मासिक शिवरात्रि’ के दिन व्रत आदि करने से भगवान शिव की विशेष कृपा द्वारा कोई भी मुश्किल और असम्भव कार्य पूरे किए जा सकते हैं… ‘अमांत पंचांग’ के अनुसार माघ मास की ‘मासिक शिवरात्रि’ को ‘महाशिवरात्रि’ कहते हैं… दोनों पंचांगों में यह चन्द्र मास की नामकरण प्रथा है, जो इसे अलग-अलग करती है… मैं सभी भक्तगणों को इस पावन दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं…”

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