दिल्ली सरकार है असली बॉस,एलजी नहीं : AAP की बड़ी जीत,सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर

Delhi Govertment vs LG मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना अहम फैसला सुना दिया है Supreme Court Verdict On AAP vs Centre Over Power Tussle.

MewarNews: 

Delhi Govertment vs LG मामले में Supreme Court ने अपना फैसला सुना दिया है.6 दिसंबर 2017 को मामले में पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा था. बुधवार को Supreme Court की संविधान पीठ ने अपने मुख्य फैसले में कहा कि मंत्री-परिषद के पास फैसले लेने का अधिकार है और चुनी हुई सरकार लोकतंत्र में अहम है . संविधान पीठ ने फैसला दिया कि सारे मामले में LG की सहमति जरूरी नहीं, लेकिन कैबिनेट को फैसलों की जानकारी देनी होगी. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, हमने सभी पहलुओं – संविधान, 239एए की व्याख्या, मंत्रिपरिषद की शक्तियां आदि – पर गौर किया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि दिल्ली का असली बॉस दिल्ली सरकार है यानी चुनी हुई सरकार ही है . बता दें कि Delhi Govertment vs LG के इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में 11 याचिकाएं दाखिल हुई थीं.

Delhi Govertment vs LG मामला LIVE UPDATES: 

– Aam Aadmi Party के नेता राघव चड्ढा ने कहा कि Supreme Court ने साफ कर दिया है कि Land, Police और Law-And-Order सरकार के अधीन नहीं आएंगे. इन तीन विषयों को छोड़कर चाहे वह बाबुओं के Transfer का मसला या और नई शक्तियां हों, वह सारी शक्तियां अब Delhi Govertmen के अधीन आ जाएंगी.

– Delhi के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि Delhi की जनता का एक ऐतिहासिक फैसला था, आज Supreme Court ने एक और महत्वपूर्ण फैसला दिया है. मैं Delhi की जनता की तरफ से इस फैसले के लिए धन्यवाद करता हूं, जिसमे न्यायालय ने जनता को ही सर्वोच्च बताया है. LG को मनमानी का अधिकार नहीं, Delhi Govertmen के काम को रोका जा रहा था.

– चीफ जस्टिस ने कहा कि संघीय ढांचे में absolutism और अनार्की की कोई जगह नहीं.

–  जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि LG को दई गई एड एंड एडवाइस एलजी पर बाध्यकारी नहीं.

– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई फैसला लेने से पहले LG की अनुमति लेने की जरूरत नहीं, सिर्फ सूचना देने की जरूरत. साथ ही कोर्ट ने कहा कि छोटे-छोटे मामलों में में मतभेद ना हो.

 राय में अंतर होने पर राष्ट्रपति को मामला भेजें LG.

– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में रियल पावर चुने हुए प्रतिनिधियों में होनी चाहिए.

– मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत है.


– संविधान पीठ का सर्वसम्मति से फैसला: LG की सहमति जरूरी नहीं, लेकिन कैबिनेट को फैसलों की जानकारी देनी होगी.

– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार और LG के बीच राय में अंतर वित्तीय, पॉलिसी और केंद्र को प्रभावित करने वाले मामलों में होनी चाहिए.

– संविधान पीठ का मुख्य फैसला: मंत्रीपरिषद के पास फैसले लेने का अधिकार चुनी हुई सरकार लोकतंत्र में अहम है

दिल्ली का बॉस कौन?

  • 11 याचिकाएं दाख़िल हुई थीं
  • अनुच्छेद 239AA के तहत विशेष राज्य
  • 5 जजों का संविधान पीठ
  • दिल्ली को विशेष राज्य के दर्जे की व्याख्या
  • संविधान पीठ ने फ़ैसला सुरक्षित रखा था
  • हाइकोर्ट ने LG को प्रशासनिक प्रमुख कहा था
  • हाइकोर्ट के फ़ैसले को चुनौती दी गई

पांच जजों की बेंच 

  1. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा
  2. जस्टिस एक सीकरी
  3. जस्टिस एएम खानविलकर
  4. जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़
  5. जस्टिस अशोक भूषण

Delhi Govertment vs LG

दिल्ली सरकार की दलील

  • LG संविधान का मज़ाक बना रहे हैं
  • काम के लिए अफ़सरों के पास भागना पड़ता है
  • कई योजनाओं की फ़ाइल पास नहीं कर रहे
  • IPS, IAS किस विभाग में काम करें, ये सरकार तय करे
  • LG फ़ाइलों को राष्ट्रपति के पास नहीं भेजते
  • असंवैधानिक तरीक़े से काम कर रहे हैं LG
  • क़ानूनन LG के पास कोई शक्ति नहीं
  • LG ख़ुद ही फ़ैसले कर रहे हैं
  • LG सरकार के अधीनस्थ नियुक्तियों की फ़ाइल ले लेते हैं
  • नियुक्तियां कौन करेगा, कई मामले लंबित

केंद्र की दलील

  • दिल्ली में सारे प्रशासनिक अधिकार LG को
  • दिल्ली में केंद्र अपना शासन चलाए ये अलोकतांत्रिक नहीं
  • दिल्ली सरकार को अधिकार दिए तो अराजकता फैलेगी
  • चुनी हुई सरकार सभी मुद्दों पर LG से सलाह करे
  • दिल्ली राजधानी है, पूरे देश के लोगों की है
  • मंत्रिपरिषद की सलाह मानने को बाध्य नहीं LG
  • केंद्र में देश की सरकार इसलिए दिल्ली पर केंद्र का अधिकार
  • दिल्ली में जितनी भी सेवाएं हैं, केंद्र के अधीन हैं
  • ट्रांसफर, पोस्टिंग का अधिकार केंद्र के पास

दिल्ली हाइकोर्ट फ़ैसला (4 अगस्त 2016)

  • आर्टिकल 239A के तहत दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश
  • हाइकोर्ट ने सरकार के कई फ़ैसले अवैध क़रार दिए
  • LG ही दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख
  • नियुक्ति, तबादले दिल्ली सरकार के अधिकार से बाहर
  • LG मंत्रिमंडल की सलाह, फ़ैसले मानने को बाध्य नहीं
  • अधिकारियों की नियुक्ति, तबादले केंद्र के पास
  • किसी फ़ैसले से पहले LG की मंज़ूरी ज़रूरी

क्या है संविधान का अनुच्छेद 239AA 

  • दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश
  • राष्ट्रपति का फ़ैसला बाध्यकारी होगा
  • दिल्ली की अपनी विधानसभा, अपना मुख्यमंत्री
  • असहमति पर मामला राष्ट्रपति के पास जाएगा
  • प्रशासक उपराज्यपाल होंगे
  • कहीं ये नहीं लिखा कि LG सलाह मानने को बाध्य
  • उपराज्यपाल राष्ट्रपति की ओर से काम करेंगे
  • सीएम, मंत्रिमंडल की मदद और सलाह से फ़ैसला करेंगे LG
  • विधानसभा के पास भूमि, लॉ एंड ऑर्डर, पुलिस अधिकार नहीं

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