आयकर रिटर्न दाखिल किया क्या ,Fixed Deposits In ITR से जुड़े ये 5 नियम जरूर जान लें

आईटीआर में सावधि जमा (Fixed Deposits In ITR)

Mewar News नई दिल्ली: 

Fixed Deposits in ITR सभी IncomeTax दाताओं को 31 जुलाई तक अपना रिटर्न फाइल करना है. यह कानून जरूरी है. लेकिन ऐसा देखा गया है कि कई बार नियमों की जानकारी नहीं होने की वजह से कुछ आयकरदाता सही से रिटर्न फाइल नहीं कर पाते हैं और बाद में आयकर विभाग उसके बाद नोटीस देने लग जाते है है. ऐसे मे बहुत सारा समय खराब हो जाता है और कई प्रकार की और बहूत सी समस्याओ का भी सामना करना पड़ता है. कई बार तो जुर्माना भी पड़ता है और कोर्ट कचहरी के जाना पड़ जाता है इन सब के लिए यह जरूरी हो जाता है कि कुछ नियमों की जानकारी पहले ही कर ली जाए  ताकि बचा जा सके.

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बचत का आसान तरीका और सबसे सुरक्षित बचत बैंकों में FD माना जाता है. इससे  जुड़े आयकर के कुछ नियम हैं जिनकी जानकारी जरूरी है. आयकर विभाग के fixed deposit से जुड़े हुए कुछ कानून  हैं. इस Fixed Deposit Account (FD) से होने वाली ब्याज की आय का जिक्र और उस पर लगने वाले कर की जानकारी देना जरूरी है.

Fixed Deposits In ITR

आइए जानें Fixed Deposits In ITR क्या है नियम:

  • यदि आपकी एफडी (FD) पर किसी एक वित्तीय वर्ष में कमाया गया ब्याज 10 हजार रुपए (earning of interests) से ज्यादा है तो उस पर 10 फीसदी के हिसाब से टीडीएस (TDS) कटेगा. उस पर भी यदि आपने पैन (PAN) नहीं दिया है, तो 20 फीसदी की दर से टैक्स काटा (Tax Deduction) जा सकता है.
  • लेकिन, यहां आपको बता दें कि यदि किसी एक बैंक की एक या उससे अधिक शाखाओं में खोले गए रिकरिंग डिपॉजिट (आवर्ती जमा खाता Recurring Deposits) या एफडी (Fixed Deposits) से होने वाली Income किसी एक वित्तीय वर्ष में 10000 के पार है तो उस पर TDS कटेगा.
  • बैंक ने TDS काट लिया हो तो भी आपको अपनी Income Tax रिटर्न फाइलिंग के दौरान इसका जिक्र करना होगा. यदि बैंक ने TDS नहीं काटा है तो भी आईटीआर फाइल (ITR filing) करते समय आपको इसे अपनी इनकम में शामिल मानते हुए इसका जिक्र करना होगा. Interest Income पर टैक्स इस बात से निर्धारित होता है कि आप किस टैक्स स्लैब में आते हैं. वैसे तो बैंक 10 फीसदी की दर से टीडीएस काटते हैं लेकिन यदि आप ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में आते हैं तो आपको रिटर्न फाइल करते समय अधिक टैक्स देना होगा.
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  • यदि सालाना Income 2.5 Lakh रुपये से कम है और आय कर छूट के दायरे में आती है यानी  और आपका वर्ष विशेष के लिए इनकम टैक्स शून्य बनता है तो आप ब्याज से हुई आय पर से टीडीएस बचा सकते हैं. लेकिन इसके लिए समय से फॉर्म 15G या 15H जमा करवाना होगा. अगर आप किसी कारण से ये फॉर्म सब्मिट नहीं करवा पाएंगे तो आपको इस रकम की वापसी के लिए रिफंड भरना होगा.
  •  राहत की बात यह है कि Saving Account के मामले में हुई Interest Income पर कोईTDS नहीं कटता. यदि एक साल में  ब्याज से होने वाली Total Income  10000/- रुपये से अधिक बन जाती है तो इस पर Tax देना होगा

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