IIT ग्रेजुएट ने पेड़ पर बना डाला 4 मंजिला आशियाना, ‘बेताल’ से मिला आइडिया

87 साल पुराना है यह पेड़, टहनियों पर ही डाइनिंग टेबल और टीवी आदि के लिए स्टैंड बनाए गए हैं।

Mewar News उदयपुर (राजस्थान).उदयपुर में एक नेचर लवर ने पेड़ पर चार मंजिला आलीशान मकान बनाकर सबको हैरत में डाल दिया है। यहां की चित्रकूटनगर कॉलोनी में आम के पेड़ पर बना यह मकान 18 साल पुराना है। IIT कानपुर के 1970 बैच के केपी सिंह इसके ओनर हैं। Mewarnews.com से बातचीत में उन्होंने बताया कि पेड़ 87 साल पुराना है। इसका तना 9 फीट गोलाई लिए हुए है। जिस पर लगभग तीन हजार से ज्यादा वर्ग फीट में फाइबर व स्टील की मदद से यह मकान बनाया गया है।एक टहनी तक नहीं काटी…

– सिविल इंजीनियर केपी सिंह बताते हैं कि जिस जगह यह मकान है, वहां कभी पहले बड़ी-सी बाड़ी थी। जिसमें चार हजार पेड़ हुआ करते थे। 20 लाख रुपए में उन्हें कटवाने का ठेका था। केपी सिंह को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने न केवल पेड़ बचाने की सोची, बल्कि पेड़ व इंसानों के बीच चले आ रहे संबंधों को दिखाने के लिए ट्री-हाउस बनवा डाला।
– उन्होंने बताया- ‘मकान बनाने में एक भी टहनी नहीं काटी गई हैं। किचन हो या बाथरूम, डालियां कमरों के भीतर से भी गुजर रही हैं। टहनियों पर ही डाइनिंग टेबल और टीवी वगैरह के लिए स्टैंड बनाए गए हैं। ऊपर तक जाने वाली सीढ़ियां फोल्डिंग सिस्टम की हैं जिन्हें बटन दबाकर बंद किया जाता है।’

– ’20 साल पहले जब मैंने ऐसे किसी मकान की परिकल्पना की थी, तब लोग मेरी बातों को सुनकर मुझे पागल समझते थे। उनके मुताबिक, ऐसा हो ही नहीं सकता था। मैंने तब इसे चैलेंज के तौर पर एक्सेप्ट किया था।’

इस ढांचे पर खड़ा है पूरा मकान
– बता दें कि स्टील ग्रिड का इस्तेमाल करके इस मकान का ढांचा तैयार किया गया है। फिर उस पर सेल्युलोस (फाइबर) शीट्स का इस्तेमाल किया। इससे वजन भी कम होने के साथ ही मजबूती भी बनी रहेगी। इस मकान को केपी सिंह ने भले ही डिजाइन किया है, लेकिन वे इसमें फोरमैन शंकरजी लोहार का भी बड़ा सपोर्ट मानते हैं। ग्रिड तैयार करने का जिम्मा उनके ही नाम था।
– ‘मैंने 8 जून, 1999 को इसकी परिकल्पना करने के बाद इसे बनाने की शुरुआत की थी, जो लगभग 18 दिसंबर 1999 को तैयार हो गया था। हमने 2000 की न्यू ईयर पार्टी इसी में की थी।’ मकान की कैपेसिटी को लेकर केपी सिंह बताते हैं कि उन्होंने 135 लोगों को एक साथ इस मकान में देखा है। मतलब, अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह मकान कितना मजबूत होगा।

 

कहां से आया ये आइडिया?

– केपी सिंह कहते हैं- ‘आंधी-तूफान में बड़े-बड़े पेड़ भी टूट जाते हैं, लेकिन इस मकान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। दरअसल, इसकी वजह एरो डायनामिक्स है। घर को इस कदर डिजाइन किया गया है कि पेड़ की टहनियों के साथ घर भी उसी दिशा में उसी प्रपोर्शन में हिलता है।’
– मकान बनाने के आइडिया के सवाल पर इंजीनियर केपी सिंह का कहना था कि वे बचपन में अमर चित्र कथाएं काफी पढ़ा करते थे। इसमें ‘बेताल’ नाम का एक कैरेक्टर था। जिसका मकान पेड़ों पर था। यहां से भी उनकी परिकल्पना को बल मिला।

Story Credit DenikBhaskar.com

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